Shayari By Tmaya Rai

धोखा करके हंस रहे है लोग
वफा करके फंस रहें है लोग
बेखबर मैं मर मर के जि रहा हुं
बेजान लोगों से सासें मांग रहा हुं

khumari

महरबानी तेरि कुछ पल खिल गइ
काटों के जहन में भी बहार आ गइ
ख़ैर कोइ बात नहीं खिलते रहना
ठिकाना वहि है जब चाहे चले आना

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बेक़रारी बढ़ता ही जाता है
तुम जब याद आ जाते हो
दिल ए चुप के से रो लेता है
मिलते मिलते छूट जाते हो

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बहक नहिं जाए ए कदम
दहक नहिं जाए ए बदन
अब भी कहीं कुछ बांकी है
गवाही के लिए
तबाही के लिए

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मुहब्बत बहुत बुरी चिज होती है
जलता कम जो जलाता बहुत है

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क्या मजा आता होगा छुपते छुपाने में
क्या मिलता होगा दुसरे को रुलाने में

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गुम ना हो जाउं कहिं गम के बादलों में
कहीं का नहिं छोडा मुझे उन जालिमों ने

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चाहनेवालों की आंखो से
अगर वह बह जाए
अश्क ही क्यों ना हो
किम्मत अदा हो जाए

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चाहत कब दगा दे जाए
दुश्मनी कब पनप जाए
अजीब सी इंसानी फितरत
जैसे हो कोई
शीश महलकी खुबसुरत इमारत

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नाच रहा है बेखबर बन के मोर
लग जाए ठोकर अंधेरे घनघोर
सन्नाटा छा रहा है चारों ओर
न मचा दे बादल कहीं कोई शोर

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प्यार का सागर होगा
गोता लगाने के लिए
बहुत कुछ होगा
लूटने लुटाने के लिए

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बेबफाई से भी बफा की उम्मीदें
समझ न आए जो आसानी से
वही तो है फलसफा प्यार के

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डर लगता हैं उनकी खामोसी से
ऊब न जाऊं कई अपने आप से

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बिछड़ना हो या मिलना हो
दिल ए तेरा हो गया है
धूप हो या हो कोई छांव
प्यार का मौसम छाया है

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प्यार के बिना भी महफ़िल वो सजती होगी
अंदर गम के घेरे बाहर खुलकर हंसती होगी

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