Shayari By Tmaya Rai

लोग खामखा प्यारको
बदनाम करते फिरतें हैं
आसानी से अगर ए मिलता
अपनी बरबादी का कारण
खुद क्यों बनतें है

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कुछ इस तरह उनसे
मुलाकात हो गइ
बातें दिलकी
दिल ही में रह गइ

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ना समझ कम इसे
आतीसबादी है ए दिल की
जल गया तो फिर न कहना
आगाह नहिं किया था कभी

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आज तेरे दिवाने कल वही
किसी और के लिए होगें
बफा काम आएगी मेरी
बेबफाइ से मुंह मोडने के लिए

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अगर तु कहे सुबह को शाम
आंखे बंद कर लुगीं
साथ मिलता रहे तेरा
हरहाल में खुस रहुंगी

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तु हैं मेरि जिंदगी
सलामती तेरी दुवाओं में
मेरे लिए तुम्हे जिना हैं
तेरे बिन कुछ नहिं मेरे

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दिल की दास्तां हैं
जरा संभलकर पैर रखना
पत्थर दिल की आगे
खुदको कभी कुचलने मत देना

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बाहर बरफके गोलें
अन्दर आगके शोले
वक्त को पता लग चुका है
किस में कितना  दम है

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फुल तो होते ही है खिलने के लिए
भला काटों के किस्मत में ए सब कहां

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बाहर से दिखती है बहुत ही खुबसुरत
अंदर से कुछ नहिं बस पत्थर की मुरत

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खफा इतना नसीब मुझ से
रहम नहिं खाता अकेलेपन से

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रोना आता है कभी कभी ए सोंचकर
सबके लिए मैं और मेरे लिए कोही नहिं

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किसी और के लिए
छोड गए वह मुझे
कसमें वादें अधुरे
गीन गीन कर थक गए

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अपने गिरेबान में झांको पहले
उंगली उठना बंद हो जाएगा

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नजदीक जाने से
कौन रोक सकता है
बचा कौन है
खुबसुरती की गीरफ्त से

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दो दिल मिल जाए
कोही क्या बिगाडेगा
परिनदें है प्यार में
सरहदे नहीं बाँध पाएगा

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शायद कुछ नइ कहानी बनने वाला है
छुटे हुए मंसुबो ने हलचल सुरु किया है

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वह चला क्या गया हम से दूर
तन्हा रहने के लिए हो गए मजबुर

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बगावत पर उतर आता है ए दिल
जब से मुहब्बतको खुदा माना है

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प्यार का इक लम्हा मागा था
बदले में जान भी तो ले सकता था

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मुतासीर हुए
तेरे हर एक अंदाज से
बचा कौन पाएगा
अब बरबाद होने से

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पिछ्ले बार की तरह
अश्क ही होंगे तेरे हिस्से
हो सके तो दोहोराना मत
दर्द से भरे दर्द के किस्से

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मेरे सामने ना कर दिल कि बातें
जज्बात को देखा है कइ बार
दम तोडते हुए

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