Shayari By Tmaya Rai

हालात बदलते बदलते
मुफलीस हो गए
खाइ था सामने
और रास्तें नजर आए

sad
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कब्र की धुल नहीं
कब्र की फूल बन जाएंगे
लगी है आजादी दाव पर
बगावत पर उतर आएगें

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मोम होता तो अच्छा था
फिर पिघल ने में गम क्या था

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दिल ए दर्द हर रंग से वाकीफ है
अगर फुल भी चुभ्ने लगे
कांटे होते किसलिए है

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कितना बेदर्द हैं ए ख्वाब
बचा नहीं कुछ तोड़ने के लिए
फिर भी इसको चैन नहिं मिलता
कुछ ना कुछ ढुंढ ही लेता है ….

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कभी बहन कभी बेटी और कभी पत्नी
किम्मत चुकाते चुकाते थक गई हूं
कोही नहिं दिख रहा है नजदिक से भी
खुद से खुद को बचा रहीं हुं

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थकते नहिं खुसी छुपते छुपाते
और गम बांटने के लिए
सारी दुनीया कम पड रहे हैं

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जवानी के चर्चे
बहुत जोरि से चलता है
मिजाज की रंगीनिया
हर अन्दाज में खिलता है ….

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फूल के हार की आगे
कांटों की बोल तो लगे
फ़िर ना कहना
फुल को जलना नहिं आता

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तसव्वुर तेरा हो और शायराना हम ना हो
ऐसा भी क्या दिल हो और दिवाने ना हो …

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उड़ना चाहें पंछी अगर
आजादी की किम्मत क्या होगी
खुद से नज़र चुराना पड़े
सज़ा की हदें क्या होगी …

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लिख लेगें हम दिल की अफसाने
अगर वह मिटने पर आमादा हो जाए

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राही है राह बदलते रहते हैं
चाहत की रंग खिलते उतरते हैं

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दम हैं तो जोर लगाकर देखो
इस दिल पर उतरकर
आजादी के मोहर लगादो

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दिल पर इख्तियार नहीं
तुझ पे एतबार नहीं
रुकना कहां होगा और
लौटना कब होगा

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बुलंदी उसको आसमान दे गया
सितारें जैसे उसके ही हो गए …

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कुछ तुम इशारों से
और कुछ में नज़रों से
बस बातें ही करते रहे

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बाजार में मिला तो बाजारू हो गए
चाहत पनप आई तो रुबरु हो गए

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बजता जा रहा है मज़बूरी के घुंघुरू
और लोग है  बोल लगाने पर उतारू

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