Shero Shayari By TMAYA RAI – (शेरो शायरी संग्रह -8 )

जलन किसी ने दिया
हम तो बस उसको बुझाने चले
वो तो शराफत थी हमारी
सिर्फ शराबी बन गए

lonely

इन आखों ने बहुत कुछ बिकते हुए देखा हैं
सौदा अच्छा हो तो  ईमान भी हिलते हुए देखा हैं
गुमशुम  हैं दिल सबकुछ पता होते हुए भी
बेवफा से वफा करने से मिल क्या रहा हैं

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ऐसा नहीं सबको सबकुछ आता हो
कुछ आप में हो और हम में ना हो
सबब जो भी हो बहुत अच्छा लगा
बात करने के लिए बहाना तो मिला

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आप हम सब एक ही कश्ती पर सवार है
किनारा इसे मिल जाए दिल जान हाजीर है
इतना ही कहना चाहते हैं खैरियत से है
किसी दिन मुलाक़ात होगी इंतजार है

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वादा करके मुकर जाना
संभलते संभलते फिसल जाना
तेरा फितरत मेरा किस्मत
बहुत कुछ कह गया

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वह याद आ गए और उनकी रुसुवाई भी
अलग नहीं रह सकते अलग होते हुए भी ..

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पर्दा हम से क्यों कौन हैं हम
कौन रोके क्या हैं गम

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तेरी दुनिया आबाद हो इसीलिए बर्बाद हो रहे हैं
ख़फ़ा तुमसे नहीं फिर भी खुश नहीं हो पा रहे हैं ..

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राज़ राज़ न होता अगर साथ तेरा रहता
गम के साए में घुट घुट कर युँ जीना न पड़ता

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ज़िल्लत झेलने की ताकत नहीं रही
सोंचता हूं पीछा छुड़ा लूं उनसे

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वह कौनसी मनहूस दिन था
जब हमने हमदर्द उनको समझ लिया

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मेरी ज़न्नत तेरी बांहो में हैं
मेरी सुकून तेरी पनाहों में हैं

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शराव और शराबी ए दोनों के बीच में
खामखा बोतल को टूटना पड़ता हैं ..

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आपके एटीट्यूड पर हम तो फिदा हुए
चलो जोर लगाके दिखते हैं होता क्या हैं

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दूर चला गया हैं दर्द देकर
नाउम्मीदी पर उम्मीद की मोहर लगाकर

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लगता हैं कभी कभी जोर से उन्हें एक तमाचा मार लूं
सबकुछ भुलाकर नए सिरे से अपने -आपको तलास लूँ

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क्या कुछ नहीं किया फिर भी कम पड़ गए
साहिल दिखाकर मझदार पर छोड गए  ..

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तेरी दुनिया बसने से पहले उजड़ जाए
बूंद बूंद अश्क मेरे  तुम पर अपना हक जताए

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