Hindi Shayari By Tmaya Rai

 

मंजिल तो नहिं था वह
अब जाकर मालुम चली है
सही हो जाएगा सब
बस रास्तें बदलने की देरी है

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तुम्हें भुलने के लिए
क्या नहीं करना पड रहा है
इस हकिकत से अन्जान
तू है की चैन की सासे ले रहा है

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कौन सा बाजार होगा जहां
खुसीयों की खरीदारी चल्ता होगा
नहीं तो कब का अपनें आपको
दांव पर लगा चूका होता

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तौबा किया उनसे जिसका प्यार
बस लफ्जों में ही होते है
मुहब्बत जिस पर बार बार महरबानी करें
कम लोग ऐसा भी मिलते हैं

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जीना दुसवार किया है अपनों ने
गुल क्या खिलाया है सपनों ने

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बफा का सिला अगर बेबफाइ से मिल जाए
प्यार के लिए फिर कैसे हामी भरें

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जब जब तेरि यादें जहन को हिला देते है
सासें ही क्यों न हो बड़ी मुश्किल से लिए हैं

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अगर तुम्हें याद करना छोड़ दिए
कहाँ से लाए मिठास लफ्जों में

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जिद नहिं जिने की फिर भी जिए जा रहें हैं
उन्हे देखने की तमन्ना लीए मरे जा रहें है

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तु क्या है असल में
ए तो तु ही जानता है
पर तु क्या है मेरे लिए
और भी लोग जानते हैं

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धडकता नहिं ए दिल किसी और के लिए
इस में पहरा उनका जो रहता है …

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काश ए होता और काश वह होता
ऐसा लगता हैं जैसे ए काश लफ्ज
बस होंठ हिलाने के लीए ही बने हो

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इरादा तो हमेसा ही नेक रहा हैं
पर वफा हमारी कभी रास न आइ

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मिल जाए खुसी तुम्हें फांसले से
सामने नहिं आउगीं कभी तेरे

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इंतजार कब का खत्म हो चुका हैं
गुमशुदगी की वजह जानकर क्या करें

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खुदको भी झेलना मुस्किल हो रहा है
और कहता हैं सांया बनकर साथ रहुंगा

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कुछ भी हो जाए बस सोंचना नहिं है
कल का पता नहिं आज तो अपना हैं

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थाम लिया है सपनों के दामन
तुम बड़े बेरहम हो

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